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Hang to death
बठिंडा (प्रवीण सिंगला) बठिंडा विकास मंच द्वारा फांसी की सजा पर तुरंत रोक लगे विषय पर विचार गोष्ठी शिव मंदिर स्ट्रीट में लेखक और समाज शास्त्री राजिंद्र चावला की अध्यक्षता में आयोजित की गई | इस अवसर पर मुख्य वक्ता प्रो. एनके गोसाईं थे। उन्होंने कहा कि फांसी की सजा अमानवीय है | यह किसी अपराध को रोकने या कम करने में सहायक नहीं है | यह भी एक प्रकार का अमानवीय कृत्य है | विश्व के लगभग सभी महान लेखको, विचारको और राजनेताओं ने इसके विरूद्ध समय-समय पर आवाज बुलंद की है | इसलिए सभी को एकजुट होकर फांसी की सजा पर रोक लगाने हेतु प्रयास करना चाहिए। राजिंद्र चावला ने कहा कि महात्मा गांधी, जय प्रकाश नारायण, डॉ.भीमराव अंबेडकर तथा अन्य अनेक महान लोगों ने फांसी पर रोक लगाने हेतु आवाज बुलंद की थी | आंकड़े भी गवाह हैं कि फांसी की सजा जारी रखने से अपराध कम नहीं होते हैं।
बठिंडा विकास मंच के प्रधान राकेश नरूला ने कहा कि फांसी की सजा पर तुरंत रोक लगनी चाहिए। विश्व के 133 देशों ने फांसी की सजा पर रोक लगाई है। महात्मा बुद्ध, भगवान महावीर और महात्मा गांधी के देश में फांसी को जारी रखना बहुत ही शर्म की बात है | उन्होंने सरकार से अपील की कि फांसी की सजा पर तुरंत रोक लगे। सेवाराम सिंगला ने बताया कि 1974 से 1978 के बीच भारत मे 29 लोगों को फांसी दी गई | 1982 से 1995 के बीच 17 लोगों को फांसी दी गई | उन्होंने कहा कि सभ्य समाज मे फांसी की सजा जारी रखने का कोई औचित्य नहीं है।